कावड़ ल्याओ पिया चालो ने हरिद्वार को

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

कावड़ ल्याओ पिया चालो ने हरिद्वार को

कावड़ उठा के चालु गी मैं कावड़ियों के रेले में,

झुमु नाचू गी पिया जी भोले नाथ के मेले में,

गंगा नहाउ पिया चलो ने हरी द्वार को,

कावड़ ल्याओ पिया चालो ने हरिद्वार को

हरिद्वार में भोले जी का भंडारा करवाना से,

कावड़ में गंगा मैया का जल भी भर के लाना से,

ज्योत जलाऊ पिया चालो ने हरिद्वार को,

कावड़ ल्याओ पिया चालो ने हरिद्वार को

सच्चे मन से रत्न लाग रही मैं भोले की डोरी को,

संग में अपने ले आउंगी उस आजाद मन डोरी को,

केसु मैं गाउ पिया चालो ने हरिद्वार को,

कावड़ ल्याओ पिया चालो ने हरिद्वार को

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।