मेरी भक्ति तू मेरी शक्ति तू

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

मेरी भक्ति तू मेरी शक्ति तू

में कुछ भी नही प्रभु सब कुछ तू

मेरे प्रभु है जिनवर है जिनवर

तेरी जय जय जय जय हो..........

पूजा भक्ति हम करेंगे

मन मे भक्ति भाव लिए

है प्रभु मेरे आदि जिनेश्वर, है प्रभु मेरे आदिनाथ

श्वेताम्बर हो या हो दिगम्बर हम जैनी बस जैन है

हम तो है अनुयायी प्रभु श्री आदिनाथ महावीर के

हम करेंगे खूब भक्ति और भजन मन जोड़ के

पूजा भक्ति हम करेंगे

मन मे भक्ति भाव लिए

है प्रभु मेरे आदि जिनेश्वर, है प्रभु मेरे आदिनाथ

हम में हो भक्ति हम में ही शक्ति हमसे ही कल्याण है

जैन हम और जैन तुम, महावीर की संतान है

हम बनेंगे एक शक्ति, पंथ भेद को छोड़ के

पूजा भक्ति हम करेंगे

मन मे भक्ति भाव लिए

है प्रभु मेरे आदि जिनेश्वर, है प्रभु मेरे आदिनाथ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।