इस जैन धर्म मे जिनागम

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॥ पावन पाठ ॥

अहिँसा परमोधर्म: अहिँसा परमोधर्म:

अहिँसा परमोधर्म: अहिँसा परमोधर्म:

इस जैन धरम में जिनागम

और संतो का समागम

हमे पल-पल पल-पल धर्म की याद दिलावे है

हम भटके ना जीवन मे, मार्ग दिखावे है

इस जैन धरम में जिनागम

और संतो का समागम

जैन धर्म में ही तो तत्व ज्ञान मिलता है

कैसे रुके है हिंसा वो विज्ञान मिलता है

तू जैन धर्म में आया, शुभ कर्मों से ये पाया

हमे पल-पल पल-पल धर्म की याद दिलावे है

हम भटके न जीवन मे, मार्ग दिखावे है

इस जैन धरम में जिनागम

और संतो का समागम

लेकरके मुनि दीक्षा जो संत बनते है

वे ही तो आने वाले अरिहंत बनते है

लेके जैनेश्वरी दीक्षा, हमे देते धर्म की शिक्षा

हमे पल-पल पल-पल धर्म की याद दिलावे है

हम भटके न जीवन मे, मार्ग दिखावे है

इस जैन धरम में जिनागम

और संतो का समागम

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।