मैं तेरा जी गुरु जी मैं तेरा जी

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

कई जन्मा तो बाद होया है आज सवेरा जी,

मैं तेरा जी गुरु जी मैं तेरा जी,

पापा दी है धुंद सी छाई दिसदा न मैनु मेरा साई,

चढ़ाया सूरज डुगरी दे विच जग होया रोशनाई,

मैं तेरा जी गुरु जी मैं तेरा जी,

दर दर जाके शीश निभाया दूर होया न दुःख दा साया,

बड़े मंदिर विच आके मेरा दिल हरषाया जी,

मैं तेरा जी गुरु जी मैं तेरा जी,

देवी देव जीहदे चरण नु परसन,आज होया मैनु सोहना दर्शन,

गुरु जी तेरे नाम दा कजला अखा विच पावा जी,

मैं तेरा जी गुरु जी मैं तेरा जी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।