मेरे बाबा भोले नाथ सब देवो में देव निराले

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मेरे बाबा भोले नाथ सब देवो में देव निराले,

अंग पे राख जमा ली और जटा से बेहवे गंगा,

लगा समादि बैठ गये और माथे सोहे चंदा,

देखो गले में जुल रहे कैसे नाग ये काले काले,

मेरे बाबा भोले नाथ सब देवो में देव निराले,

हुआ समंदर मंथन उसमे अमिरत ज़हर निकला,

देख देव सब गबराये बाबा पी गये विष का प्याला,

तब से नील कंठ हुआ नाम ये है भगतो के रखवाले,

मेरे बाबा भोले नाथ सब देवो में देव निराले,

शिव के जैसा देव नहीं है दुनिया में माँ दूजा,

दानव देव सभी करते है शिव भोले की पूजा,

ये है दानी देव महान इनसे जो चाहो वर पा ले,

मेरे बाबा भोले नाथ सब देवो में देव निराले,

अरे गंगा जी में गोते लगा के कंधे कावड़ उठा ले.

शिव भक्ति से खुल जावन गे तेरे बंद किस्मत के ताले,

करले सुमिरन सुबहो शाम सोनू बम बम बम गा ले,

मेरे बाबा भोले नाथ सब देवो में देव निराले,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।