मुझे ऐसा बना दो मेरे प्रभु

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॥ पावन पाठ ॥

मुझे ऐसा बना दो मेरे प्रभु

मुझे ऐसा बना दो मेरे गुरु, जीवन में लगे ठोकर न कहीं ।

जाने अंजाने भी मुझसे, नुकसान किसी का हो न कहीं ।

१) जो तेरा बनकर रहता है, काँटों में फूल सा खिलता है

जितने भी कांटें पाँव लगे,पर फूल भी हो कांटें न कहीं ।

मुझे ऐसा बना दो...

२) इक तू ही मेरा ऐसा है, दुःख में भी साथ नहीं तजता

दुनिया मुझे प्यार करे न करे, खोऊँ तेरा भी प्यार न कहीं ।

मुझे ऐसा बना दो...

३) मन हो मधुपुर में कलश मेरा, आँखों में ज्योति झलकती रहे

तुझे मधु ऐसा पीने को, जागत ही रहूँ सोऊँ न कभी ।

मुझे ऐसा बना दो...

४) उपकार सदा करता जाऊँ, दुनिया अपकार भले ही करे

बदनामी न हो जग में मेरी, कोई नाम भले ही दे न कहीं ।

मुझे ऐसा बना दो...

५) मैं क्या हूँ राह मेरी क्या है, यह सत्य सदा मैं समझ सकूँ

इस राह पे चलते चलते कहीं, मेरे पाँव थके न कहीं ।

मुझे ऐसा बना दो...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।