भोले की निकली टोली मिरग शाला कमारियाँ बाँध के

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोले की निकली टोली मिरग शाला कमारियाँ बाँध के,

मस्ती में सब ही झूमे लागे लेके डमरू हाथ में,

बाबा बर्फानी की गूंजे जय कारा अमरनाथ में,

भोले की निकली टोली मिरग शाला कमारियाँ बाँध के,

सावन के पावन महीने में देखो छटा हरयाली है,

दादरु मोर पपीहा बोले बोले कोयल मतवाली है,

बाँध लिया है सिर पे भगवा बाबा के अस्वाद से,

भोले की निकली टोली मिरग शाला कमारियाँ बाँध के,

पूर्व पश्चिम उत्तर दक्षिण भगवा ही लहराए गा,

भोले की किरपा से अब राम मंदिर बन जाएगा,

आओ मिल कर कसम खाये बाबा के दरबार में,

भोले की निकली टोली मिरग शाला कमारियाँ बाँध के,

भक्ति भाव से लिखते लाला गाते भानु श्री है,

देवघर बाबा जल्दी भुलाओ हम सब की अर्जी है,

चले गे साथ में भाइयाँ सचिन जी राकेश भाइयाँ की गाडी से,

भोले की निकली टोली मिरग शाला कमारियाँ बाँध के,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।