महावीर जी का दर है सुहाना

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

महावीरजी का दर है सुहाना

ओ भक्तो बार बार चले आना

के करने से जिनवर भक्ति

मिलती है अद्धभुत शक्ति

जो भी महावीरा के दर पे आ जाता है

बिन मांगे ही सब कुछ पा जाता है

निशदिन प्रतिपल प्रभु को जो ध्याता है

सोया भाग उसका जग जाता है

प्रभु का हो जाये वो दीवाना दीवाना दीवाना

ओ महावीरजी का दर है सुहाना

ओ भक्तो बार बार चले आना

के करने से जिनवर भक्ति

मिलती है अद्धभुत शक्ति

सौम्य छवि प्रभुजी की, अद्धभुत निराली

प्रभु निर्वाण को पाए, शुभ दिन दीवाली

चाँदनपुर महावीरजी जो आता है

टीले वाले बाबा का दरश जो पाता है

उसका हो जाये उद्धारा उद्धारा उद्धारा

महावीरजी का दर है सुहाना

ओ भक्तो बार बार चले आना

के करने से जिनवर भक्ति

मिलती है अद्धभुत शक्ति

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।