मंदिर में आ पुण्य कमा

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

मंदिर में आ पुण्य कमा

जीवन को अपने सफल बना

जीवन में तेरे न होगा तनाव

मंदिर में आ, अर्घ चढ़ा

कर ले भजन और अभिषेक

पुण्यो से मिलता है नर भव एक

ये मानव जन्म जैन धरम अब तू न जाने कब पायेगा

जिनवर को भज, पापो को तज, संसार सागर से तर जाएगा

प्रभुजी की भक्ति में खुद को रमा

जीवन को अपने सफल बना

जीवन में तेरे न होगा तनाव

मंदिर में आ, अर्घ चढ़ा

कर ले भजन और अभिषेक

पुण्यो से मिलता है नर भव एक

जन्मो से था तेरा ये भाव, शुभ कर्मों का ही था ये प्रभाव

जिनवर को भज, पापो को तज, संसार सागर से तर जाएगा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।