कावड़िये नाच रहे

पारंपरिक
महादेव भजन कृष्ण भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

ओये होये कावड़िये नाच रहे,

होलियो जल्दी जल्दी त्यार चलो चलो हरिद्वार,

बोलो बम बम की जैकार,

ओये होये कावड़िये नाच रहे

गंगा में घोटे लगावे गमा गम भर के चिलम फिर मारया गे दम,

आजा मेरे यार मत कर जयदा सोच विचार,

हम भोले का परिवार,कावड़िये नाच रहे

ओये होये कावड़िये नाच रहे

नील कंठ जाके नजारा देख लो हरिद्वार घूम घूम सारा देख लो,

सच्चा भोले का दरबार मांगो कोठी बंगले चार,

माहरी भोले सुने पुकार कावड़िये नाच रहे

ओये होये कावड़िये नाच रहे

चाला गे सारे मिला के कदम भीम सैन हम भी किसी से नही कम,

कहता राणा बाराम बार भोले छोड़ न मझधारा

सच्ची भोले की सरकार कावड़िये नाच रहे

ओये होये कावड़िये नाच रहे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।