आज भोले का डमरू भाजे गा सब के द्वार

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मनोकामना मंदिर में हो रही जय जयकार,

सवा कविण्टल चाँदी का शिवलिंग बना है पहली बार,

आज भोले का डमरू भाजे गा सब के द्वार,

शिव और शक्ति वास करे बरेली की नाथ नगरी में,

यहाँ भारत के साधू संत है आते बरेली की नाथ नगरी में,

यहाँ अलखनाथ वो पेशवर नाथ की हो रही जय जय कार,

आज भोले का डमरू भाजे गा सब के द्वार,

नाथो की नाथ नगरी में डमरू भाजे डम डम,

भोले तेरे भक्त है आते कहते जाते बम बम,

कावड़िये मस्ती में नाचे भोले के दरबार,

आज भोले का डमरू भाजे गा सब के द्वार,

जब से वसि है दिल में मेरे भोले की तस्वीर रे,

मेरी हो गई बल्ले बल्ले बदली है तकदीर रे,

बिन मांगे भोले बाबा ने भर डाले भंडार,

आज भोले का डमरू भाजे गा सब के द्वार,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।