जिया भजत रहत दिन रैन

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

जिया भजत रहत दिन रैन,

उमासुत, भजत रहत दिन रैन,

जिया भजत रहत दिन रैन,

उमासुत, भजत रहत दिन रैन,

प्रथम 'सुमुख', 'एकदन्त' हैं दूजे,

प्रथम 'सुमुख', 'एकदन्त' हैं दूजे,

कपिल उचारौ बैन, उमासुत, भजत रहत दिन रैन,

'गजकर्णक' 'लम्बोदर' पंचम, 'गजकर्णक' 'लम्बोदर' पंचम,

'विकट' 'विघननाशक' हैं सप्तम, सुखद 'विनायक नैन,

उमासुत, भजत रहत दिन रैन,

'धूम्रकेतु' 'गणनायक' दसवें, 'धूम्रकेतु' 'गणनायक' दसवें,

'भालचन्द्र' 'गज-आनन' द्वादशे, भजत पड़े तब चैन,

उमासुत, भजत रहत दिन रैन,

जिया भजत रहत दिन रैन, उमासुत, भजत रहत दिन रैन,

(गीत रचना-अशोक कुमार खरे)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।