ये माना कन्हिया मैं सुदामा नही हू

अलका गोएल
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ये माना कन्हिया मैं सुदामा नही हू

मगर हाल मेरा सुदामा के जैसा

तंदुल हमारे तुमने ना खाये

हमने भी तुमसे चने ना छुपाये

ये माना सखा मैं तुम्हारा नही हू

मगर..........

कन्हिया कन्हिया पुकारा था उसने

सुदामा सुदामा पुकारा था तुमने

मेरा नाम लेकर तुमने पुकारा

मगर.........

है मुझको भरोसा आओगे मोहन

मुझे भी गले से लगाओगे मोहन

भगत सुदामा के प्रीत नही है

मगर...........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।