कीवे व्यान करा सतगुरु तेरी महिमा अप्रम पार

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॥ पावन पाठ ॥

कीवे व्यान करा सतगुरु तेरी महिमा अप्रम पार,

जग ते तोड्या शीशे वांगु तू लाया सीने नाल,

कीवे व्यान करा सतगुरु तेरी महिमा अप्रम पार,

उस बगियाँ दा कुल सी मैं जिथे बोर कदे न आई,

नजर गुरा दी पई जदो ते आप बहारा आई,

चंगे माडे दा ज्ञान देके मैनु किता वेडा पार,

सतिगुरु मेरा हीरे वरगा किवे सिफ़्ता करा व्यान,

कीवे व्यान करा सतगुरु तेरी महिमा अप्रम पार,

औखे वेले कोई भी मेरे सखा न नेड़े आया,

तद मैं गुरु दे चरनी बह के अपना हाल सुनाया,

पुंज के हंजुवन सतिगुरु मेरे जीवन दा दिता सार,

ोहड़ ले भगति चादर वांगु ते मैनु रख ले नाल,

कीवे व्यान करा सतगुरु तेरी महिमा अप्रम पार,

लोकि अपना देखा जानन दर दर ठोकर खांदे,

गुरु दसे जो राह चले ओ किस्मत अपनी बणांदे,

पापा दी मेरी गठरी दा ऐवे किता हल्का भार,

मन चमकाया तू दर्पण वरगा मीठी वाणी नाल,

कीवे व्यान करा सतगुरु तेरी महिमा अप्रम पार,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।