सावन का महिना है मौसम भी सुहाना है

नरेन्द्र चंचल
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सावन का महिना है मौसम भी सुहाना है,

मैया ने भुलाया है दरबार को जाना है,

सावन का महिना है मौसम भी सुहाना है

ज़न्मो की प्यास मेरी आज मिट जायेगी,

चिंतपूर्णी मात मेरी मेरे पास आएगी,

ना मैया ने रूठना है ना मैंने मनाना है,

सावन का महिना है मौसम भी सुहाना है

माँ के भगतो माँ से मांग लो आज दाती मेहरबान है,

आज माँ का ध्यान लगा लो आज माँ को सबका ध्यान है,

कोई खाली नही जायेगा आज भगवती ने ठाना है,

सावन का महिना है मौसम भी सुहाना है

दर पे सब खड़े होंगे मैं भी खड़ा हूँगा,

सब के साथ चरणों में मैं भी पड़ा हूँगा,

सब के दिल की जाने माँ क्या सुनना सुनाना है,

सावन का महिना है मौसम भी सुहाना है

जिस पर हो तेरी किरपा उसे कोई मिटा न सके,

तूने जिसको मिटाया है माँ उसे कोई बना न सके,

तेरी माया को कया समजे चंचल तो दीवाना है,

सावन का महिना है मौसम भी सुहाना है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।