गोवर्धन की परिकर्मा

पारंपरिक
महादेव भजन कृष्ण भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

गोवर्धन की परिकर्मा देवे भोले विष्णु ब्रह्मा,

सब देव घन भी आये गई सात कोस परिकर्मा,

ये तो भर भर भर दूध की धार चढ़ावे,

इन्दर देव सब आधी पुष्प बरसावे,

गोवर्धन की परिकर्मा देवे भोले विष्णु ब्रह्मा,

आप सभी का दिल से मैं स्वागत करता हु,

सब के अधूरे काम मैं पुरे करता हु,

दान घाटी पे आके सब ने दूध चढ़ाया,

जय हो तेरी गिरधर नारद ने वीणा भजाया,

ये तो भर भर भर दूध की धार चढ़ावे,

इन्दर देव सब आधी पुष्प बरसावे,

गोवर्धन की परिकर्मा देवे भोले विष्णु ब्रह्मा,

बोले हनुमत लाल मैं गोवर्धन को जाऊ,

सब देवे परिकर्मा तो मैं कैसे रह जाऊ,

यहाँ हनुमान जी का आना गिरवर पे दूध चढ़ाना,

सब भगतो तुम भी आओ गिरवर पे दूध चढ़ाओ,

ये तो भर भर भर छप्पन भोग लगावे है,

इन्दर देव सब आधी पुष्प बरसावे,

गोवर्धन की परिकर्मा देवे भोले विष्णु ब्रह्मा,

हुई किरपा मुझपे भी गोवर्धन को मैं जाऊ,

कर परिकर्मा गिरधर की ये जीवन सफल बनाऊ,

तुम बना लो चाकर अपना अपने चरणों में रखना,

अब और कोई ना भावे गिरधर गिरधर ही रटना,

ये तो भर भर भर दूध की धार चढ़ावे,

इन्दर देव सब आधी पुष्प बरसावे,

गोवर्धन की परिकर्मा देवे भोले विष्णु ब्रह्मा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।