भूतों प्रेतों का ये डॉन है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

नाम भी अनोखे जिनके काम भी अनोखे है,

मस्तक पे चंदा ऑन है बोलो रे बोलो भगतो ये कौन है,

भूतों प्रेतों का ये डॉन है

सर्पो की गल में माला पड़ी,

अंग भभूति रग रग में लगी,

कांपे है जो मृत्यु भी जिनसे चलते है जो अंगारे बरसे,

ये पहने मृगो की छाला है जो दुनिया जिनकी जान है,

बोलो रे बोलो भगतो कौन है,

भूतों प्रेतों का ये डॉन है

हाथो में त्रिशूल सोहे तेरे

तांडव से तेरे दुनिया डरे,

कुर्मी अमन दीवाना है तेरा,

दास पिंटू भी मस्ताना है तेरा,

मेरे मस्तक चंद तिलक लगा दो ये भोले की आन है,

भूतों प्रेतों का ये डॉन है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।