हाय रे मेरे प्रियतम मोहना

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हाय रे मेरे प्रियतम मोहना, तुझ बिन कहाँ सुख पायें,

हाय रे मेरे प्रियतम मोहना, तुझ बिन कहाँ सुख पायें,

हाय रे मेरे प्रियतम मोहना,

तेरी वंशी अंखियाँ नम करे, राधा के मन पर सितम करे,

तेरी वंशी अंखियाँ नम करे, राधा के मन पर सितम करे,

मन तूँही, आ बहला दे, हम कैसे बहलायें।

हाय रे मेरे प्रियतम मोहना, तुझ बिन कहाँ सुख पायें,

हाय रे मेरे प्रियतम मोहना,

सुनके मुरली बेज़ार दिल, मिलने को है बेकरार दिल,

सुनके मुरली बेज़ार दिल, मिलने को है बेकरार दिल,

बस रोये, न पल सोये, हम क्या क्या बतलायें,

हाय रे मेरे प्रियतम मोहना, तुझ बिन कहाँ सुख पायें,

हाय रे मेरे प्रियतम मोहना,

ये नैना तुमसे उलझ गये, तुम धोका देके सुलझ गये,

ये नैना तुमसे उलझ गये, तुम धोका देके सुलझ गये,

हम कैसे, भी तुम जैसे, धोके न कर पायें,

हाय रे मेरे प्रियतम मोहना, तुझ बिन कहाँ सुख पायें,

हाय रे मेरे प्रियतम मोहना,

तूँ है तो दिल को चैन है, जो नहीं तो दिल बेचैन है,

तूँ है तो दिल को चैन है, जो नहीं तो दिल बेचैन है,

तुम आओ, जी समझाओ, हम कैसे सुकूँ पायें,

हाय रे मेरे प्रियतम मोहना, तुझ बिन कहाँ सुख पायें,

हाय रे मेरे प्रियतम मोहना,

तेरे चंचल नैना कहर ढहें, मेरे सुन्दर नैना नीर बहें,

तेरे चंचल नैना कहर ढहें, मेरे सुन्दर नैना नीर बहें,

अब तूँही, तो बतला दे, व्रज तजके कहाँ जायें,

हाय रे मेरे प्रियतम मोहना, तुझ बिन कहाँ सुख पायें,

हाय रे मेरे प्रियतम मोहना,

(गीत रचना- अशोक कुमार खरे)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।