मानव किसका अभिमान करे

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॥ पावन पाठ ॥

मानव किसका अभिमान करे दिन चढ़ते उतरते आते है,

किस्मत जो साथ नहीं देती,पत्थर भी उच्छल कर आते है,

जिसके दरवाजे देव सभी सलामी देने आते है,

किस्मत ने खाई पलटी पल में,पत्थर भी तीर जाते हे

कण,नाड,रावण,कुम्भकर्ण रण में रणधीर कहाते है,

उनकी सोने की लंका पर वानर भी फतेह कर जाते है

जिनके बाणों की वर्षा से महायोद्धा भी घबराते हे,

अर्जुन के जैसा महायोद्धा किन्नर बन समय बिताते हैं,

उपकार सबकुछ ईश्वर का, सच्चे सन्त यही बतलाते हे,

प्रपंच झूट कपट ने तजो,सांवरिया साथ निभाते हे,

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।