साई का दीवाना है मेरा दिल साई का दीवाना है

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॥ पावन पाठ ॥

साई के दर को छोड़ के सारे जग से बेगाना है,

साई का दीवाना है मेरा दिल साई का दीवाना है,

लगन लगी है ऐसी ये दिल साई साई गाता है,

साई मेरा मैं साई का हर पल शोर मचाता है,

सच कहता हु भगतो अब न भेद छुपाना है,

साई का दीवाना है मेरा दिल साई का दीवाना है,

नाम साई का लेकर मेरे दिल की धड़कन चलती है,

साई नाम की मेरे मन में शमा सदा ही चलती है,

उस शमा पे जलने वाला इक परवाना है,

साई का दीवाना है मेरा दिल साई का दीवाना है,

दिल की बाते दिल जाने या जाने साई राम है,

उस की धुन में खोया रहता क्या सुबह क्या शाम है,

इस दीवाने दिल को छोड़ो क्या समजाना है,

साई का दीवाना है मेरा दिल साई का दीवाना है,

साई का ये दिल दीवाना सागर खुल के कहता है,

और कोई न दूजा इस में साई मेरा रहता है,

ढोल बजा के दुनिया को यह राज बताना है,

साई का दीवाना है मेरा दिल साई का दीवाना है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।