मेरे जीवन की जुड़ गयी डोर किशोरी तेरे चरणन में

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरे जीवन की जुड़ गयी डोर, किशोरी तेरे चरणन में |

किशोरी तेरे चरणन में, महारानी तेरे चरणन में ||

तेरी ऊँची अटारी प्यारी, मैं वारी तेरी गलियन पे |

मेरी जीवन की हो जाये भोर, किशोरी तेरे चरणन में ||

तू एक इशारा कर दे, मई दौड़ी आऊं बरसाने |

मैं तो नाचूं बन कर मोर, किशोरी तेरे चरणन में ||

मेरा पल में भाग्य में बदलदे इशारा तेरी करुणा का |

मेरे जन्मों की कट जाए डोर, किशोरी तेरे चरणन में ||

थक सा गया हूँ जगत झंझट में स्वामिनी बाल में तुम्हारा |

भाव सागर में डूब रहा है सूजत नाही किनारा ||

ऐसे दीन अनाथ को तुम को कौन सहारा |

आओ और पकड़ लो उंगली अपना जान दुलारा |

मेरी आहों से झोली भर दे तू बस जा तन मन में |

मुझे ढूंढें नन्द किशोर, किशोरी तेरे चरणन में ||

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।