कलयुग के अवतार हैं साईं

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॥ पावन पाठ ॥

कलयुग के अवतार हैं साईं जग के पालनहारे,

उनकी लाज को रखते है साई आये जो उनके द्वारे,

कलयुग के अवतार हैं साईं

सचे मन से साईं नाथ को जिसने भी पुकारा है,

मिल कर उसको पल भल में साईं जी का सहारा,

मन वंचित फल उसने पाया जिसने शरदा से शीश निभाया,

कलयुग के अवतार हैं साईं....

दुःख दर्दो को साईं नाथ जी अपनी किरपा से हरते है,

रंक को बनाये राजा पल भर में एसे भंडारे भरते है,

तू भी अपने कष्ट मिटा ले साईं जी की किरपा पा ले,

कलयुग के अवतार हैं साईं........

सब का मालिक इक यहाँ पर साईं ने ये बतलाया है,

सब ने इक समान यहा पर इनके दर्श को पाया है,

साईं नाम की ज्योत जला ले फूटी किस्मत को तू बना ले,

कलयुग के अवतार हैं साईं.........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।