बरसाना प्रेमी भक्तो का है यह पागलखाना

मनीष शर्मा एवं पंकज शर्मा
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

बरसाना बरसाना, हो...

प्रेमी भक्तो का है यह पागलखाना

राधा नाम के पागल राधा गुण गाएं

जग की नहीं परवाह मुक्ति को ठुकराएं

बरसाने की भूमि, हो...

सब धामो की मुकट मणि, मनमोहन ने चूमी

बरसाने में विहरत जहां वृषभानु लली

मुकुट से देत बुहारी मोहन उसी गली

बरसाना बरसाए, हो...

पात्र अपात्र को भी राधा प्रेम सो सरसाए

राधा दामिनी के संग जहां घनश्याम रहे

इसी लिए बरसाना याको वेद कहे

हुआ चंचल ब्रह्म अचल, हो...

शीश धरे राधा, कहे जयति जयति हर पल

पूर्ण ब्रह्मा जो वेदो में कहलाता है

भानु लली के निसदिन चरण दबाता है

जो भी राधा गुण गाए, हो...

रीझ के मनमोहन वाके हाथो में बिक जाए

जो भी राधा राधा राधा नाम कहे

राधा नाम दीवाना वाके संग रहे

बरसाना बरसादो, हो...

शरण में आए हैं, इक झलक तो दिखला दो

बरसाने वारी के दर्शन करवादो

हे बरसाना हमपे करुणा बरसादो

राधा राधा राधा राधा नाम कहो

रमण बिहारी के चरणन के निकट रहो

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।