हारे हारे हारे क्यों राम के सेवक हारे

पारंपरिक
हनुमान जी भजन राम भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

क्यों वीरान अयोध्या राम बिना यु है,

संकट मोचन के घर में संकट क्यों है,

आज पुकार करे सरयू की धारे रो रो कर यही कह रही,

हारे हारे हारे क्यों राम के सेवक हारे,

क्या राम की सेना रही ना हनुमान सा क्या कोई नहीं,

अंचल मेरा लहू से रंगा था रो ही रही मैं रो ही रही,

पीड़ा बता न सकू क्या करू,

हारे हारे हारे क्यों राम के सेवक हारे,

चूड़ी पहन कर बैठे हो घर में पुरुष तुमहरा कहा खो गया,

हिन्दू हो तुम हिन्दू है हम हिंदुत्व को जाने क्या हो गया,

संदीप आचार्य का दर्द है,

हारे हारे हारे क्यों राम के सेवक हारे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।