मस्त महीना सावन का

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

गोरा रिम झिम पड़े फुहार जे मस्त महीना सावन का,

रे जल्दी रगड़े क्यों न भांग के लेगी मूड बनावन का,

रे भोले ये जोड़े दो हाथ भांग तेरी घोटी जावे ना,

करुँगी सखियाँ गले सैर बीच में टांग अडावे ना,

ठंडी ठंडी पवन चले बिन भांग डट्या न जावे,

काची काची भांग देख मेरी भूख ये बढ़ती आवे,

रे गोरा मिल तने परनाम देख ला मने सतावन का,

मेरी सखी सहेली आ रे सी आज से घुमन की तयारी,

अरे लेहु नजारा पर्वत का तुम बात मान लो माहरी,

रे भोले उठे बदन में लोर चाल अब डाटि जावे ना,

मैं और किसे का लाडा न बस भांग का घना स्वादु,

घोटन में और बथेरे रे पर तेरे हाथ में जादू,

रे गोरा कौन सा उपाये बता दे तने मनावन का,

तेरी भांग घोट के त्यार गरी तेरी गेहल करू थी हासी,

अरे ठयावस कर ले इक मिंटमें भर के ले औ गिलासी ,

भोले दिविंदर फौजी क्यों अब इतना अजमावे न,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।