माँ दे दर्शन मुझे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ दे दर्शन मुझे आस दर्शन की लेके मैं तो आया पेहली बार,

ओ मैया जय हो तेरी ओ मैया जय हो तेरी,

प्यास तेरे दर्शन की लेकर है राह निहार रहे,

अमृत की इक बून्द मिले माँ कब तोरा उपहार रहे,

आये तेरी शरण आस दर्शन की लेके मैं तो आया पेहली बार

ओ मैया जय हो तेरी ओ मैया जय हो तेरी,

मन मंदिर में ज्योति जगा के श्रद्धा पुष्प चड़ाउ माँ,

बना के थाली इन होठो की तेरी महिमा गाउ माँ,

खिले मन का चमन आस दर्शन की लेके मैं तो आया पेहली बार

ओ मैया जय हो तेरी ओ मैया जय हो तेरी,

रुडऱानी भरमाणी माइयाँ तुझको शीश झुकाउ माँ,

दे वरदान तेरे चरणों में बार बार याद आउ माँ,

करते दुःख का दमन आस दर्शन की लेके मैं तो आया पेहली बार

ओ मैया जय हो तेरी ओ मैया जय हो तेरी,

तेरे दर्श की चाह में मैया अखियां तरसे राणा की,

दे दर्शन कर प्रशन मैया आस जगा दे राणा की,

करता तुझको नमन आस दर्शन की लेके मैं तो आया पेहली बार

ओ मैया जय हो तेरी ओ मैया जय हो तेरी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।