गुर चरने चित ला बन्दया,बीती जाए जिंदगानी ओ

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॥ पावन पाठ ॥

गुर चरने चित ला बन्दया,बीती जाए जिंदगानी ओ

ओ बन्दया,बीती जाए जिंदगानी ओ...

लक्खा चौरासिये चोले पाई करी

विषया वीकारा विच मन जो लगाईं करी

जीव ने जो बिरथा ना गँवा बन्दया,

बीती जाए जिंदगानी ओ...

ओ बन्दया,बीती जाए जिंदगानी ओ...

चार तिआड़िया दी जिंदड़ी तेरी,

काजो तू करता मूया मेरी मेरी |

इक दिन सब छड जाना बन्दया,

बीती जाए जिंदगानी ओ...

ओ बन्दया,बीती जाए जिंदगानी ओ...

कइयां जन्मादा बिछड़या प्यासा

गुरु चरना विच रखी लै आशा |

जीना भव पार लगाना बन्दया,

बीती जाए जिंदगानी ओ...

ओ बन्दया,बीती जाए जिंदगानी ओ...

कल-कल कर दियां उम्र जे बीती,

गुर चरणज मुया लायी ले प्रीती |

गन परमेसर दा गाना बन्दया,

बीती जाए जिंदगानी ओ...

ओ बन्दया,बीती जाए जिंदगानी ओ...

सचखंड विच मुया तेरा वासा,

छडी जाना सब कुछ,रई जाना प्यासा |

पुला अपनइया बख्शा बन्दया,

बीती जाए जिंदगानी ओ...

ओ बन्दया,बीती जाए जिंदगानी ओ...

सोच तू करले,ऐबा बखशाइले,

छड दे घमंड मुया,हरी गन गए ले |

गुरा दिया महिमा जो पहचान बन्दया,

बीती जाए जिंदगानी ओ...

ओ बन्दया,बीती जाए जिंदगानी ओ...

गुर चरने चित ला बन्दया,बीती जाए जिंदगानी ओ

ओ बन्दया,बीती जाए जिंदगानी ओ...

प्रभु चरने चित ला बन्दया,बीती जाए जिंदगानी ओ

ओ बन्दया,बीती जाए जिंदगानी ओ...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।