कावड़ियाँ था कावड़ियाँ हु कावड़ियाँ ही रहुगा

पारंपरिक
श्री गणेश भजन शिव भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

आठो पेहर गांव शहर,

गांव शहर आठो पेहर,

भोले बाबा की जय जय कहुगा,

कावड़ियाँ था कावड़ियाँ हु कावड़ियाँ ही रहुगा,

देखना भोले पाँव के छाले मस्तक पे शिव धुनि लगा ले

भरले पावन गंगा जल तेरा सवर जाएगा कल,

कह दे भोले से दुःख न सहुगा,

कावड़ियाँ था कावड़ियाँ हु कावड़ियाँ ही रहुगा,

शिव है शक्ति साथ हमारे गणपति भप्पा काज सवारे,

झोली भर जायेगी तेरी विक्की अब न होगी देरी,

तेरी गंगा की भाति बहुगा,

कावड़ियाँ था कावड़ियाँ हु कावड़ियाँ ही रहुगा,

ॐ नमो नमो जपो शिवाये इस मंत्र से शंकर आये,

नील कंठ मेरे भोले बाबा द्वार दया के खोले बाबा,

शिव चरणों में जाकर बहुगा,

कावड़ियाँ था कावड़ियाँ हु कावड़ियाँ ही रहुगा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।