गोरा तू घोट दे भंगियाँ

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

गोरा तू घोट दे भंगियाँ बिन भांग रहा न जाये,

पिया फुट गइयो सिल्वटा तेरी भांग न घोटी जाये,

बिन भांग नहीं रह पाउगा मैं सिलवटा मँगवाऊगा,

कई दिन होये बिठाये बिन भांग रहा न जाये,

गोरा तू घोट दे भंगियाँ

पिया घोटु न तेरी भांग कति चाहे हो जाऊगी अभी सती,

तेरी भांग कलेजा खाये मोसे रोज न घोटी जाये,

पिया फुट गइयो सिल्वटा तेरी भांग न घोटी जाये,

मोहे आदात पड़ गई पीने की ये दवा बन गई जीने की,

गोरा तू क्यों गबराये बिन भांग रहा न जाये,

गोरा तू घोट दे भंगियाँ

मैं तो आज पीहर जाऊगी तेरी ऐसी भांग गुटाऊगी

कुछ और नजर न आये तेरी भांग न घोटी जाये,

पिया फुट गइयो सिल्वटा तेरी भांग न घोटी जाये,

धमकी से तेरी ना डरु चाली जा दूजा व्याह करू,

सुन वर्मा को बरमाये बिन भांग रहा न जाये,

गोरा तू घोट दे भंगियाँ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।