इक सांस आये रे इक सांस जाए रे | आत्मिक भजन

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॥ पावन पाठ ॥

इक सांस आये रे,इक सांस जाए रे

जियरा भी पास में फसता जाए रे ।

सांस पहर बन ढलता जाए,

सखी सईयां ना आये रे ॥

चार कहार मिली डोलिया उठावे,

सखवा से पाती तोड़ ले जावे ।

सांस पखेरू बन उड़ता जाए,

सखी सईयां ना आये रे ॥

नैन मूंदे तो मैं जागी,

गाँठ खुले मन का ओ रे राही ।

इक आस आये,जब सांस जाए,

सखी सईयां आये रे ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।