आई आई जुलाई सत आई जी

पारंपरिक
अन्य भजन गुरुदेव भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

आई आई जुलाई सत आई जी,

हॉवे हॉवे वधाई वधाई जी,

आया आया जन्मदिन गुरु जी दा,

छावा छावा के नचने नु दिल करदा,

आई आई जुलाई सत आई जी,

भागा वाला दिन चड़ेया है होये मुबारक सब नु.

मुड़ मुड़ आखा शुकराना मैं ऊंचे सुचे रब नु,

होइ होइ मेहर सब संगता ते,

किती किती किरपा कुल दुनिया ते,

आई आई जुलाई सत आई जी,

आप ही करदा आप करांदा सब कुछ मेरा दाता,

नाल निमाने साहिल दे ओह आप निभावे नाता,

तारे तारे गुरु जी तूसी लखा तारे,

आखा आखा की मैं तुहाडे वारे,

आई आई जुलाई सत आई जी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।