सब तो प्यारे मेरे गुरु जी

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॥ पावन पाठ ॥

सब तो प्यारे मेरे गुरु जी,हर वेले मैनु आखदे,

फ़िक्र न कर बन्दिया मैं हु नाल तेरे,

मनगो नहीं मनो एह है गुरु जी दा कहना,

ज़िंदगी दा सच एही आईओ ही है रहना,

उचियाँ हो मंजिला या हों उचे सुपने,

जेहड़ा रेह्न्दा नीवा फल ओहदे ते ही लगने,

तेरियां ही रेहमता तो दिन मेरे लंग दे,

सब तो प्यारे मेरे गुरु जी,हर वेले मैनु आखदे,

तेरियां ही ब्लेसिंग रेह्न्दियाँ हर सिर ते,

संगता दे दिला विच तुसी ही हो वसदे,

बैठे बिठाये कम मेरे बन जांदे ने,

करदे हो सब तुसी मैनु चंगा कहन्दे ने,

तेरिया ही रेहमता तो दिन मेरे लंग दे,

सब तो प्यारे मेरे गुरु जी,हर वेले मैनु आखदे,

तेरी दीद दा चाह मैनु चड़ेया,

मैं दर दर जा सा तनु लभदा,

ओ गुरु जी तुहाडा शुक्र करा मैं दिता औकात तो मैनु कई कई ज्यादा,

ॐ नमः शिवाये शिव जी सदा सहाये,

ॐ नमः शिवाये गुरु जी सदा सहाये,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।