मैं क्या जानू मेरे रघुराई तू जाने मेरी किस में भलाई

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॥ पावन पाठ ॥

मैं क्या जानू मेरे रघुराई, तू जाने मेरी किस में भलाई

सहारा तेरा रे, ओ साईं

सारे द्वारे छोड़ भगवन आज मैं तेरे द्वारे आया ।

बाह पकड़ लो अब तो ठाकुर, तेरे दर पर सीस झुकाया ।

इस दुनिया की भीड़ भाड़ में, तेरा ही आधार ॥

सहारा तेरा रे, ओ साईं...

तू हो पारस जिस को छूकर लोहा भी सोना हो जाए ।

तेरी शरण में जो भी आवे वो पापी पावन हो जावे ।

बीच भवर में नैया मेरी अब तो लगा दो पार ॥

सहारा तेरा रे, ओ साईं...

सारे जगत को देने वाले मैं क्या तुझ को भेंट चढ़ाऊँ ।

जिसके स्वांस से आए खुशबू मैं क्या उनको फूल चढ़ाऊँ ।

अपरम पार यही महिमा तेरी कोई ना जाने पार ॥

सहारा तेरा रे, ओ साईं...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।