मैं बनी भगतनि भोले की

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

तू गंगा जी न जावन दीता आद्दत से तेरी रोले की,

मैं बनी भगतनि भोले की,

सास ससुर की सेवा तजके खावे हवा हिंडोले की,

तू किसी भगतनि भोले की,

तू न्यू बक बक करया करे क्यों दोश मेरे ते धरा करे,

तने हलवा ख्वा दियां कागा से और पूरी खिंडादी झोले की मैं बनी भगति भोले की,

तू गंगा जी न जावन दीता आद्दत से तेरी रोले की,

तू फंडयान हलवा ख्वावे से मेरा बाबू भूखा लेखावे से,

तने जोन सी नार ले जावे से मैं जानू लुगाई ठोले की,

तू किसी भगतनि भोले की,

ये दो दिन रोटी पोले गा तू बता की मादा हॉवे गा,

कमल सिंह मने खरचा देना तो अंगूठी बेच क्यों तोले की,

तू गंगा जी न जावन दीता आद्दत से तेरी रोले की

चल सारे मिल के चला गे मेरे माँ बाबू भी नहा लेंगे,

गुण शिव गोरा के गा लेंगा न दसा रहा समय ओले की,

फेरा मारा फॅमिली भोले की,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।