आसरो बालाजी म्हणे थारो थे कस्ट निवारो

लखबीर सिंह लक्खा
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

आसरो बालाजी म्हणे थारो, थे कस्ट निवारो ,

पधारो माहरे आगणिए पधारो,

थारी मैं बुलावा जय जय कार,

थारी मैं बुलावा जय जय कार,

सालासर में सज्यो है दरबार

अंजनी का लाला दुखिआरा दातार

थाने जो धेआवे करेदो बेडा पार

काटदो धन्नेओ दुःख महारो, कस्ट निवारो ,

पधारो माहरे आगणिए पधारो

थारी मैं बुलावा जय जय कार,

साधेया हो थे राम जी रा का काज

शरण पड़ेया की रखो जी म्हारी लाज

बैठया मैं उडीका बजरंगी थाने आज

चालणो नहीं रे कोई लारो, थे कस्ट निवारो ,

पधारो माहरे आगणिए पधारो,

थारी मैं बुलावा जय जय कार,

बल देवो में बड़ा ही कमजोर

तारणहार मैं पापी घनघोर

थे ना सुनुँगा सुनेगो गुण और

थारो ही ओ सरल बिचारो, थे कस्ट निवारो ,

पधारो माहरे आगणिए पधारो ,

थारी मैं बुलावा जय जय कार,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।