मस्ती में आये रहे भोले जी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मस्ती में आये रहे भोले जी कैसे हरषाये रहे भोले जी,

डमरू भजाये रहे भोले जी नाच दिखाये रहे भोले जी,

मेला में सज गये भंडारी कावड़ियों के आ रहे लारे,

क्यों देर लगा रहे भोले जी भक्त भुला रहे भोले जी ,

कावड़ियों में भर के लोटा खुभ लगाया जम के घोटा,

अब खूब चढ़ा रहे भोले जी सब को नचा रहे भोले जी,

राम अवतार तेरा भगत पुराना नीतू का कर सफर सुहाना,

तुम्हे राही मनाये रहे भोले जी,भजन बनाये रहे भोले जी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।