आज रल मिल भंगड़े पाऊ जन्म दिन गुरु जी दा

पारंपरिक
महादेव भजन गुरुदेव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

दिन भागा वाला आया जन्म दिन गुरु जी दा,

आज रल मिल भंगड़े पाऊ जन्म दिन गुरु जी दा,

खुशियां ही खुशिया चारो पास दिल विच वजदे ढोल नगाड़े,

देवो देवो नि वधाईयां जन्म दिन गुरु जी दा,

आज रल मिल भंगड़े पाऊ

मेरे गुरु जी दी महिमा न्यारी बल बल जाऊ मैं बलिहारी,

रब मेरा सतगुरु बन के आया जन्मदिन गुरु जी दा,

आज रल मिल भंगड़े पाऊ

मेरे गुरु जी शिव अवतारी नाम तेरे दी चढ़ी खुमारी,

नि मैं नच नच कमली होइ जन्म दिन गुरु जी दा,

आज रल मिल भंगड़े पाऊ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।