कण कण में महाकाल वसे है

पारंपरिक
हनुमान जी भजन राम भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

कण कण में महाकाल वसे है जन जन में श्री राम है,

प्राणो में है माता जानकी मन में वसे हनुमान है,

चीर के सीना दिखा दियां सीने में वसे श्री राम है,

मेरे काम की चीज नही जिसमे न मिले प्रभु राम है,

मुख से जय श्री राम ही निकले जब तक इस में जान है,

कण कण में महाकाल वसे है जन जन में श्री राम है,

राम लिखा पत्थर पे तो पत्थर पानी पे तेर गये,

जिस ने किया है वैर राम से वो जीते जी मर गये,

अंत समय रावन के मुख से निकला राम का नाम है,

कण कण में महाकाल वसे है जन जन में श्री राम है,

कहते अर्जुन प्रेम हमारी नईयां भी पार करो,

जैसे तारी एहलैयाँ जी अब मेरा भी उधार करो,

दसरथ राज दुलारे राम को बारम बार परनाम है,

कण कण में महाकाल वसे है जन जन में श्री राम है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।