नारायण नारायण हरि हरि

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जय नारायण नारायण

जय जय नारायण नारायण

जय जय नारायण नारायण हरी हरी

जय जय नारायण नारायण हरी हरी

सवामी नारायण नारायण हरी हरी

सवामी नारायण नारायण हरी हरी

तेरी लीला सबसे न्यारी न्यारी

हरी हरी

तेरी लीला सबसे न्यारी न्यारी

हरी हरी

तेरी महिमा है पर्भु प्यारी प्यारी

जय जय नारायण नारायण हरी हरी

सवामी नारायण नारायण हरी हरी

जय जय नारायण नारायण हरी हरी

सवामी नारायण नारायण हरी हरी

हमने जग में देखा तो पर्भु यही लगा

तेरी जग में है भगवान देगा ही देगा

देगा ही देगा

तेरी जग में है भगवान देगा ही देगा

देगा ही देगा

मन में सोचा तो ये जाना

बिन तेरे यहाँ पर कोई न सागा

बिन तेरे यहाँ पर कोई न सागा

हम तुझ पे जाये वारी वारी

हरी हरी

जय जय नारायण नारायण हरी हरी

सवामी नारायण नारायण हरी हरी

जय नारायण नारायण

जय जय नारायण नारायण हरी हरी

सवामी नारायण नारायण हरी हरी

लक्ष्मी नारायण हरी हरी

सत्ये नारायण हरी हरी

जय जय नारायण नारायण हरी हरी

सवामी नारायण नारायण हरी हरी

लक्ष्मी नारायण हरी हरी

सत्ये नारायण हरी हरी

जय जय नारायण नारायण हरी हरी.

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।