साई हो दीदार तेरा ते मैं शुक्र मनावा गा

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॥ पावन पाठ ॥

साई हो दीदार तेरा ते मैं शुक्र मनावा गा,

चाहे छोड़ नि दुनिया पड़े छोड़ के आवा गा,

साई हो दीदार तेरा ते मैं शुक्र मनावा गा,

साई ऐसा हो मेरा कर्म दुआ सब की माँगा करू,

पहले मैं सब की कहु फिर अपनी सुनाया करू,

तेरे दर का फ़कीर हु मैं ऐसे ही बताऊ गा,

चाहे छोड़ नि दुनिया पड़े छोड़ के आवा गा,

साई हो दीदार तेरा ते मैं शुक्र मनावा गा,

साई जिंदगी तूने दी जब चाहे बुला लेना,

माँ बाप की सेवा को जन्मो तक लिख देना,

उनके पास रहु बाबा ते मैं शुक्र मनावा गा,

चाहे छोड़ नि दुनिया पड़े छोड़ के आवा गा,

साई हो दीदार तेरा ते मैं शुक्र मनावा गा,

बोलो साई राम साई राम साई राम साई,

मेरा दिन भी तू मेरी रात भी तू,

मेरा कल भी तू मेरा आज भी तू,

मेरा यार भी तू मेरा प्यार भी तू,

मेरी ईद भी तू नमाज भी तू,

मेरे दिल में तू मेरे साथ में तू,

बोलो साई राम साई राम साई राम

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।