काशी पति सदा शिव कैलाश के बसैया

परमानंद
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

काशी पति सदाशिव कैलाश के बसैया,

ओ विश्वनाथ बाबा तुम तो तन में भसम रमैया,

गल कालिया विराजे नर मुंडनों की माला,

रहते नशे में निशदिन पी पी के भंग प्याला,

संग भूत प्रेत योगिनी योगिनी बेताल के रसिया...काशी,

दाता तुम इस जहान में भोला सदा कहते,

दर तेरे जो भी आते मुंह मांगा वर है पाते

वर देने में अटल हो अटल हो खतरा गजब लेवैया... काशी...

ओ गौरी नाथ स्वामी एक छोटी सी है अरजी,

तारो ना तारो मुझको भोला तुम्हारी मर्जी,

ओ"परमानंद"खबर लो खबर लो शिव डमरू के बजैया...काशी...

गायक-गिरधर महाराज

लेखक-परमानंद

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।