भोले भोले मेरा भी थोडा होले ओये

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोले भोले मेरा भी थोडा होले ओये,

मसांग मेरा घर राख मेरा शिंगार,

प्रेमी चाहिये ना कोई फ़ालतू का प्यार,

बस भांग का नशा है भाई तेरा ही फसा है,

दिल डोले डोले ओये भोले भोले थोडा थोडा हो ले,

दुनिया है गम बेटा भोले में है दम तेरी धुन में रहू न भोलू हरदम,

भोले भोले मेरा भी थोडा होले ओये,

ओये रगड़ रगड़ माल,

भोले भोले मेरा भी थोडा होले ओये,

भोले में दम और नाही कोई कम है,

चल मेरे संग तू चल मेरे संग है,

दुनिया ये तेरा दिमाग थोडा एडा है,

कर देगा तंग तुझको करदेगा तंग है,

भोले है विष और भोले है अमृत है,

भोले है वेस्ट और भोले ही ईस्ट है,

भोले भोले मेरा भी थोडा होले ओये,

ना फ़ालतू का शोंक न किसी से कोई पंगा,

है फेन भोले नाथ की रखी है धुन में गंगा,

तू लाख की दारू लोगे और फ़ालतू बोले गे,

मैं फ्री का भांग लुंगी उस में तुम भी ढोलो गे,

अब अब डमरू भजे गी आज भी सजे गी टोली भोले की सजे गी,

देख दुनिया हिले गी तोबा तोबा बेटा तेरी भी जले गी आज,

और मुख से निकले गी,

भोले भोले मेरा भी थोडा होले ओये,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।