गुज्जरा दे छोरे चले भोले को मानाने

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

गुज्जरा दे छोरे चले भोले नू मानौंन

कावड उठा के कंधे सर नू झुकौन

गुज्जरा दे गुज्जरा दे गुज्जरा दे छोरे चले गुज्जरा दे

गुज्जरा दे गुज्जरा दे गुज्जरा दे छोरे चले गुज्जरा दे

गुज्जरा दे छोरे चले भोले नू मानौंन

कावड उठा के कंधे सर नू झुकौन

जिद पे ओनी अड़ बैठे है

भोलेनाथ के बन बैठे है

जिद पे ओनी अड़ बैठे है

भोलेनाथ के बन बैठे है

सारे पावे रोला और लगे दम लौण

कावड उठा के कंधे सर नू झुकौन

गुज्जरा दे छोरे चले भोले नू मानौंन

कावड उठा के कंधे सर नू झुकौन

घर ते डीजे कर के चलेंगे

हरिद्वार ते जल थावेंगे

घर ते डीजे कर के चलेंगे

हरिद्वार ते जल थावेंगे

डांस करेंगे सारे नाले रौला पौन

कावड उठा के कंधे सर नू झुकौन

गुज्जरा दे छोरे चले भोले नू मानौंन

कावड उठा के कंधे सर नू झुकौन

रोके ते डीके हम्म न रुकेंगे

मन की अपने कर के हटेंगे

रोके ते डीके हम्म न रुकेंगे

मन की अपने कर के हटेंगे

दौड़ दौड़ लगे सबनू पिच्छे हटौन

कावड उठा के कंधे सर नू झुकौन

गुज्जरा दे छोरे चले भोले नू मानौंन

कावड उठा के कंधे सर नू झुकौन

रोस आदित्य कावड लावे

मोहित शिव दी महिमा गावे

रोस आदित्य कावड लावे

मोहित शिव दी महिमा गावे

लौंदे जयकारा भोले जावे खुश हौंन

कावड उठा के कंधे सर नू झुकौन

गुज्जरा दे छोरे चले भोले नू मानौंन

कावड उठा के कंधे सर नू झुकौन

लिरिक्स और स्वर - सिंगर लाडला मोहित 9627658621

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।