ओ माँ हमे अपने चरणों से लगा ले जीण माता भजन

सौरभ मधुकर
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेरे मन की वंदना...माँ तू ही,

मेरे दिल की अर्चना...माँ तू ही,

सच्ची आराधना...माँ तू ही,

जीवन की कामना....माँ तू ही,

जिस दिन से आये तेरे शरण

खुशियों से महका ये जीवन,

जनमो जनम तेरे हैं हम,अब तू ही हमे संभाले,

ओ माँ हमे अपने चरणों से लगा ले,हमको अपना बना ले,

हमको चरणों से लगा ले....

हमको तेरा ही सहारा,साथ तेरा लागे प्यारा,

हर पल जपूं तेरा नाम,

रोम रोम मेरा गाये,मैया तेरा नाम भाये,

भाये मुझे कुछ और ना,

करता रहूँ तेरा दर्शन,

तेरे नाम का करूँ सुमिरन,

जनमो जनम तेरे हैं हम,अब तू ही हमे संभाले,

ओ माँ हमे अपने चरणों से लगा ले,हमको अपना बना ले,

हमको चरणों से लगा ले....

मुझको विश्वास है माँ,मेरे आस-पास है माँ,

मुझसे है दूर तू नहीं...

जब भी मेरा मन घबराये,सर पे मेरे हाँथ फिराए,

माँ है बसी हर कहीं...

तेरे चरणों में अर्पण,अंकुश का ये जीवन

जनमो जनम तेरे हैं हम,अब तू ही हमे संभाले,

ओ माँ हमे अपने चरणों से लगा ले,हमको अपना बना ले,

हमको चरणों से लगा ले....

मेरे मन की वंदना...माँ तू ही,

मेरे दिल की अर्चना...माँ तू ही,

सच्ची आराधना...माँ तू ही,

जीवन की कामना....माँ तू ही

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।