बाबा जी ने मेरे ते कर्म कमाया

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॥ पावन पाठ ॥

बाबा जी ने मेरे ते कर्म कमाया,

इज्ज्ता दा सिर ताज सजाया,

ऐसी किरपा किती मेरे ते झड़ वड दिति हर इक पंगे दी,

बाबा चर्चा खूब करा छड़ी ते अंगूठा छाप जाहे बंदे दी,

बाबा चर्चा खूब करा छड़ी ते अनपढ़ देसी बंदे दी,

जुड़ियाँ तार तेरियां नाल तारा चर्चा होगी विच बाजरा,

खबर नहीं की सुर ते ताला चार चुफेरे पैन धमाल,

ऐसी मात भुधि बक्शी करा परख मैं माडे चंगे दी,

बाबा चर्चा खूब करा छड़ी ते अंगूठा छाप जाहे बंदे दी,

तेरी किरपा होगी चर्चे सोचने ते मजबूर कई करते,

कई साढ़े नाल करदे जेलस पर साढ़े ते तेरी रेहमत,

चरना दे नल लाके रखी होव दर्द न लगे कंडे दी,

बाबा चर्चा खूब करा छड़ी ते अंगूठा छाप जाहे बंदे दी,

ओह दानी सी बिन भी फरना बन के रखदा सी मैं परना,

देसी नु देसी टकराये मगन अंदन जाहे तुसा मिलाये,

मकंद बूथगड वाला लिख्दा रतनो भगत रंग रंगे दी,

बाबा चर्चा खूब करा छड़ी ते अंगूठा छाप जाहे बंदे दी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।