बिन मांगे सब मुझको मिला है साई का ये प्यार है

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॥ पावन पाठ ॥

बिन मांगे सब मुझको मिला है साई का ये प्यार है,

झोली ज़ाह खाली भरती वो बाबा का दरबार है,

बिन मांगे सब मुझको मिला है साई का ये प्यार है

सारे जहां से दीन दुखी आते है दरबार में,

साई सब की सुनलेते है दिल की जो भी पुकार है,

बिन मांगे सब मुझको मिला है साई का ये प्यार है

आप की शिरडी में बाबा है उजाला नूर का,

खूब सूरत है नजारे महकी महकी बहार है,

बिन मांगे सब मुझको मिला है साई का ये प्यार है

साई तुम्हारे नाम का दुनिया में चर्चा होता है,

जो सिर चढ़ के बोले बाबा आप का चमत्कार है,

बिन मांगे सब मुझको मिला है साई का ये प्यार है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।