जो शरण गुरु की आया

पारंपरिक
महादेव भजन गुरुदेव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

सुख का साथी जगत सब,

दुःख का साथी न कोए l

दुःख का साथी साँईयाँ,

दादू सद्गुरु होए ll

जो शरण, गुरु की आया,

इहाँ लोक सुखी, परलोक सुखी ll

जिसने, गुरु ज्ञान पचाया,

इहाँ लोक सुखी, परलोक सुखी ll

ह्री ॐ ह्री ॐ, ह्री ॐ ह्री ॐ ll

रामायण में, शिव जी कहते l

भागवत में, सुकदेव जी कहते l

गुरबाणी में, नानक कहते l

जपो, संत संग राम,

इहाँ लोक सुखी, परलोक सुखी l

ह्री ॐ ह्री ॐ, ह्री ॐ ह्री ॐ ll

चिन्ता और भय, सब मिट जाए l

दुर-गुण दोष, सभी छूट जाए l

चमके, भाग्य सितारा,

इहाँ लोक सुखी, परलोक सुखी l

ह्री ॐ ह्री ॐ, ह्री ॐ ह्री ॐ ll

साँसो में हो, नाम का सिमरण l

मन में हो, गुरुदेव का चिन्तन l

जिसने, यह अपनाया,

इहाँ लोक सुखी, परलोक सुखी l

ह्री ॐ ह्री ॐ, ह्री ॐ ह्री ॐ ll

ब्रह्म ज्ञानी, साकार ब्रह्म है l

इन का ना, कोई बंधन है l

सब को, करे महान,

इहाँ लोक सुखी, परलोक सुखी l

ह्री ॐ ह्री ॐ, ह्री ॐ ह्री ॐ ll

कृपा तुम्हरी, पा जाएंगे l

जो सतसंग में, आ जाएंगे l

हो जाएं, भवजल पार,

इहाँ लोक सुखी, परलोक सुखी l

ह्री ॐ ह्री ॐ, ह्री ॐ ह्री ॐ ll

जो संतों की, निंदा करते

अपना ही वह, वँश मिटाते

जो संत, शरण में आते,

इहाँ लोक सुखी, परलोक सुखी l

ह्री ॐ ह्री ॐ, ह्री ॐ ह्री ॐ ll

मेरे राम मेरे राम xll -ll

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।