मेरे मथे उते लिख दे ना अपना

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरे मथे उते लिख दे ना अपना ,

जेहड़ा वेखे समज जाये तेरी वे,

लंग जाये जिंदगी मेरी वे

सात समुन्दर डुंगे दिल विच प्यार वसा लिया तेरा,

तुहि दस हूँ तेरे वाजो होर कौन है मेरा,

मेरी दुभ्दी तार वेहड़ी वे लंग जाये जिंगदी मेरी वे,

मेरे मथे उते लिख दे ना अपना

तू ही दस हूँ दिल दा दुखड़ा किस नु जान सुनावा,

होके भरदी भरदी वे मोहना ऐवे न मर जावा,

बदनामी हो जाऊ तेरी वे लंग जाये जिंगदी मेरी वे,

मेरे मथे उते लिख दे ना अपना

आ श्यामा मैनु दर्श दिखा जा ता दस तेरा की जाना,

कल दी मरदी आज मर जा सा असा ता प्यार निभाना,

आके बाह पकड़ ले मेरी वे लंग जाये जिंगदी मेरी वे,

मेरे मथे उते लिख दे ना अपना

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।