कावड़ लयावागे भोले की

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

कावड़ का मेला आया रे भोले का जादू छाया रे,

नील कंठ पे जाके सारे धूम मचावा गे,

कावड़ लयावागे भोले की कावड़ ल्यावागे,

सब से पहले गंगा जी में जाके घोते लावा,

हरिद्वार में बम बम की हम जय जय भुलावा,

शिव भगता के संग में झूमा नाचा गावा गे,

कावड़ लयावागे भोले की कावड़ ल्यावागे,

दिल्ली यूपी हरयाणे से जा भगता का टोला,

भोले नाथ का तीन लोक में माच रहा से रोला,

भोले नाथ से मिल के फुले नहीं समावा गे,

कावड़ लयावागे भोले की कावड़ ल्यावागे,

भीम सेन तू देर करे न जल्दी कर ले तयारी,

सवान के महीने में भोला बात देख रहा म्हारी,

भोले नाथ से हम भी घुट घुट के बतलावा गे,

कावड़ लयावागे भोले की कावड़ ल्यावागे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।