साथो दूर दूर जावे

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॥ पावन पाठ ॥

साथो दूर दूर जावे बाबा चंगी गल नहीं,

साथो नजर चुरावे बाबा चंगी गल नहीं,

असि बैठ गये रहा विच नजरा विछाके,

कदो करे गा गल्ला बाबा सादे नाल आके,

साड़ी सुने न सुनावे बाबा चंगी गल नी,

साथो दूर दूर जावे

दुखा दिया साढे उते झुलियाँ हनेरियाँ,

पावे गा तू कदो बाबा साढे वाल फेरियां,

हम भी तेरे दर पे सिर झुकाने आये है,

दिल की दासता तुम्हे सुनाने आये है,

जिंदगी की रास्तो से हम है बेखबर,

चिमटे वाले सैयां कर दे मेहर,

दिल का ये रिश्ता पुराना लगता है,

सारा ही संसार दीवाना लगता है,

जोगी का दरबार सुन्हाना लगता है,

रिषा तो डिग्रियां दा जोगी ही सहारा है,

मुखड़ा जोगी दा किना है प्यारा लगदा,

जोगिया वे जोगिया तेरे दरबार वाली किनी सोहनी लगदी सवेर.

स्वर्ग च रेहन वाले देवते भी मंग दे ने बाबा तेरे मंदिरा दी फेर,

जोगिया वे जोगिया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।